सिविल सोसायटी ने की कोरोना संकट से निपटने के लिए आपातकालीन कदम उठाने की अपील

कोरोना के खतरे से चिंतित सिविल सोसायटी ने देश के वंचित और तलछट में जीवन यापन करने वाले 80 प्रतिशत नागरिकों के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाने की अपील की है। दिल्ली में 53 बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार आदि ने कोरोना को एक गंभीर सार्वजनिक समस्या बताते हुए कहा है कि इससे करोड़ों लोगों की जिंदगी और आजीविका पर चिंताजनक असर पड़ने वाला है।

इसी तरह भोपाल में मुख्यमंत्री के नाम दो पत्र लिखे गए हैं। इनमें से एक में जहां बच्चों से संबंधित मांगों और सुझावों को दिया गया है, वहीं दूसरे पत्र में खाद्य सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं पर जोर देने की मांग की गई है।

दिल्ली से जारी अपील में देश की कम से कम 80 प्रतिशत आबादी को तुरंत आपातकालीन राहत देने और अगले कुछ महीनों में मनरेगा का व्यापक विस्तार हो इसके लिए सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों में आपातकालीन राहत उसके वितरण तंत्र और मनरेगा का विस्तार आदि से संबंधित 16 सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों को यहां क्लिक कर देखा जा सकता है। 

कोविड 19 के संकट से निपटने के लिए आपातकालीन कदमों के लिए अपील

सुझाव देने वालों में आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और ग्राम वाणी के को फाउंडर आदितेश्वर सेठ, केरल इंस्टीट्यूट आफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के अभय जॉर्ज, प्रोफेसर अमित बसोले, सार्थक नागरिक संस्थान की अमिता जौहरी, एनएफआईडब्ल्यू की महासचिव एनी राजा, अध्यक्ष अरुणा राय, प्रो अश्विनी देशपांडे, बाबू मैथ्यू, योगेन्द्र यादव, हर्ष मंदर समेत कई अन्य प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

भोपाल से जारी पत्रों को विकास संवाद के सचिन कुमार जैन, बीजीवीएस की आशा मिश्रा, एमपीडीआरएफ के विजय कुमार, शिक्षा अधिकार मंच के अनिल सदगोपाल, सेक्यूलर मंच के लज्जा शंकर हरदेनिया समेत विभिन्न संगठनों और समूहों ने भेजा है।

भोपाल से जारी पत्रों की प्रति नीचे संलग्न है।